Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 21, 2010 चलो हादसा एक हसीन करतें हैं. मौसम के वादे पर यक़ीन करतें हैं. हुस्न पर ऐतबार कौन नहीं करता, ये ग़लती तो बड़े बड़े ज़हीन करतें हैं. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 20, 2010 इंसान जाने किस ग़फलत में होता है. जो ख़ुद ही राहों पे कांटे बोता है. दैर-ओ-हरम की लड़ाई में लुट गई बस्तियां, मरी माँ से चिपककर, बेघर ख़ुदा रोता है. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 15, 2010 पतंगों के दरम्यान जो दूरी है. उनकी कोई मजबूरी है. रिश्ते क्या हैं पेंचे हैं, इक फ़ासला बहुत ज़रूरी है. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 03, 2010 कितनी शिरी में लिपटी मेरी जान तेरी ज़ुबान है. ज़ुबान है या रसगुल्ले की दुकान है. मुझे है शक्कर, और चख रहा हूँ लब-ए-शक्कर, मेरी जान तेरा आशिक़ दो दिन का मेहमान है. Read more
इश्क़ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 06, 2010 वो मेरा इंतिहा भी है, इब्तिदा भी. मुझमें मौजूद भी है, मुझसे जुदा भी. इश्क़ से बच सका है कौन, इसकी ज़द में इंसा भी है, ख़ुदा भी Read more
कब्रगाह Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 06, 2010 दबी कुचली सी हर चाह होती है. भटकी भटकी सी हर राह होती है. ग़रीब की आँखें आँखें कब होतीं हैं, ये तो ख़्वाबों की कब्रगाह होती है. Read more
हश्र - ए- इंसान Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 22, 2010 सितारे हँसतें हैं सितारों के हश्र पर. जो कभी अर्श पर, तो कभी फर्श पर. ज़मीन चीखती है, सुन ऐ मगरूर आदमी, हर जान चल रही है, अपने अपने कब्र पर. Read more