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मखमली धूप में लिपटी दुनिया  तेरे लम्स सी मुझे लगी दुनिया  क़रीब  है  मेरे  तिरी  ही  तरह  तिरी ही तरह अजनबी दुनिया 
दीद (Glance) की तमन्ना की हैं मारी आँखें तर-ब-तर पर प्यासी हैं बेचारी आँखें. जागते हैं ख़ाब खुली हो कि बंद, कभी हैं बीमार तो कभी बीमारी आँखें.
इस ज़मीन को ख़ुद में बसाने लगा है. वो छोटा बच्चा मिट्टी खाने लगा है. कुछ लोग घर को रेत कर गए थे, वो पागल रेत से घर बनाने लगा है.
यारा    तेरे    जूस्तजू   मे,  हो  गया  तुझसा  हूबहू  मै तुझे इश्क का खुदा बनाकर, करता हूँ अश्कों से  वजू  मैं,
बस उस इक ख़ुशी की तलाश है. मुझे मेरी ज़िन्दगी की तलाश है.  जानता  हूँ  जिसे  मैं जन्मों से, उस   अजनबी   की  तलाश  है. 
मौत है मगर ज़िन्दगी में है ज़रुरत उसकी. हर दिल पर है तेरी तरह हुकूमत उसकी. उसे कातिल कहूं तो कैसे कहूं बता...  याखुदा मिलती है तुझसे ही सूरत उसकी...
चलो हादसा एक हसीन करतें हैं. मौसम के वादे पर यक़ीन करतें हैं. हुस्न पर ऐतबार कौन नहीं करता, ये ग़लती तो बड़े बड़े ज़हीन करतें हैं.