दीद (Glance) की तमन्ना की हैं मारी आँखें
तर-ब-तर पर प्यासी हैं बेचारी आँखें.
जागते हैं ख़ाब खुली हो कि बंद,
कभी हैं बीमार तो कभी बीमारी आँखें.

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