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Showing posts from September, 2010
मौत है मगर ज़िन्दगी में है ज़रुरत उसकी. हर दिल पर है तेरी तरह हुकूमत उसकी. उसे कातिल कहूं तो कैसे कहूं बता...  याखुदा मिलती है तुझसे ही सूरत उसकी...