दुआ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 13, 2010 बाहर ढूँढना उसे बहुत मुश्किल है.मेरे दिल में ही मेरा कातिल है,खुदा उसको उससे ही महफूज़ रखे,शीशे सा बदन है, मगर संगदिल है. Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
वो जो नहीं है February 13, 2010 वो जो शब का माहताब था. और सहर का आफताब था. वर्क़ पूछतें हैं कि कहाँ गया, वो एक लफ़्ज़ किताब था ...फ़राज़ साहब के नाम. Read more
ख़ुदकुशी February 13, 2010 तक़दीर ने क्या मुझसे दिल्लगी की है. समंदर परोसा जब भी तलब -ए- तिश्नगी की है. उस खंजर पर मिले हैं मेरे ही उँगलियों के निशान, मेरे क़ातिल कह रहे हैं कि मैंने ख़ुदकुशी की है. Read more
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