कितनी शिरी में लिपटी मेरी जान तेरी ज़ुबान है.
ज़ुबान है या रसगुल्ले की दुकान है.
मुझे है शक्कर, और चख रहा हूँ लब-ए-शक्कर,
मेरी जान तेरा आशिक़ दो दिन का मेहमान है.
ज़ुबान है या रसगुल्ले की दुकान है.
मुझे है शक्कर, और चख रहा हूँ लब-ए-शक्कर,
मेरी जान तेरा आशिक़ दो दिन का मेहमान है.
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