हश्र - ए- इंसान
सितारे हँसतें हैं सितारों के हश्र पर.
जो कभी अर्श पर, तो कभी फर्श पर.
ज़मीन चीखती है, सुन ऐ मगरूर आदमी,
हर जान चल रही है, अपने अपने कब्र पर.
जो कभी अर्श पर, तो कभी फर्श पर.
ज़मीन चीखती है, सुन ऐ मगरूर आदमी,
हर जान चल रही है, अपने अपने कब्र पर.
wow fakir saheb
ReplyDeletebahut khub pharmaya..
good work keep it up .......
-----SANJAY