कब्रगाह Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 06, 2010 दबी कुचली सी हर चाह होती है. भटकी भटकी सी हर राह होती है. ग़रीब की आँखें आँखें कब होतीं हैं, ये तो ख़्वाबों की कब्रगाह होती है. Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
दुआ February 13, 2010 बाहर ढूँढना उसे बहुत मुश्किल है. मेरे दिल में ही मेरा कातिल है, खुदा उसको उससे ही महफूज़ रखे, शीशे सा बदन है, मगर संगदिल है. Read more
नाज़ुकी February 13, 2010 रंग क्या है, चांदनी के उजाले हैं. दो होंठ गुलाबी पंखुड़ियों के प्याले हैं. इस क़दर नाज़ुक हैं सनम मिरे, ख़्वाब में चले थे, पांव में छाले हैं. Read more
रफ़ू (क़ता) February 12, 2010 आओ तुमको खुद सा हू - ब - हू कर दूं. इश्क की हकीक़त से रु - ब - रु कर दूं. दर्द ही दर्द की दवा है मेरी जान, ज़ख्म पे ज़ख्म से रफ़ू कर दूं Read more
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