कब्रगाह Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 06, 2010 दबी कुचली सी हर चाह होती है. भटकी भटकी सी हर राह होती है. ग़रीब की आँखें आँखें कब होतीं हैं, ये तो ख़्वाबों की कब्रगाह होती है. Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
February 18, 2014 मखमली धूप में लिपटी दुनिया तेरे लम्स सी मुझे लगी दुनिया क़रीब है मेरे तिरी ही तरह तिरी ही तरह अजनबी दुनिया Read more
October 10, 2010 बस उस इक ख़ुशी की तलाश है. मुझे मेरी ज़िन्दगी की तलाश है. जानता हूँ जिसे मैं जन्मों से, उस अजनबी की तलाश है. Read more
November 25, 2010 यारा तेरे जूस्तजू मे, हो गया तुझसा हूबहू मै तुझे इश्क का खुदा बनाकर, करता हूँ अश्कों से वजू मैं, Read more
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