Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 25, 2012 दीद (Glance) की तमन्ना की हैं मारी आँखें तर-ब-तर पर प्यासी हैं बेचारी आँखें. जागते हैं ख़ाब खुली हो कि बंद, कभी हैं बीमार तो कभी बीमारी आँखें. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 21, 2011 इस ज़मीन को ख़ुद में बसाने लगा है. वो छोटा बच्चा मिट्टी खाने लगा है. कुछ लोग घर को रेत कर गए थे, वो पागल रेत से घर बनाने लगा है. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps November 25, 2010 यारा तेरे जूस्तजू मे, हो गया तुझसा हूबहू मै तुझे इश्क का खुदा बनाकर, करता हूँ अश्कों से वजू मैं, Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps October 10, 2010 बस उस इक ख़ुशी की तलाश है. मुझे मेरी ज़िन्दगी की तलाश है. जानता हूँ जिसे मैं जन्मों से, उस अजनबी की तलाश है. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 12, 2010 मौत है मगर ज़िन्दगी में है ज़रुरत उसकी. हर दिल पर है तेरी तरह हुकूमत उसकी. उसे कातिल कहूं तो कैसे कहूं बता... याखुदा मिलती है तुझसे ही सूरत उसकी... Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 21, 2010 चलो हादसा एक हसीन करतें हैं. मौसम के वादे पर यक़ीन करतें हैं. हुस्न पर ऐतबार कौन नहीं करता, ये ग़लती तो बड़े बड़े ज़हीन करतें हैं. Read more
Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 20, 2010 इंसान जाने किस ग़फलत में होता है. जो ख़ुद ही राहों पे कांटे बोता है. दैर-ओ-हरम की लड़ाई में लुट गई बस्तियां, मरी माँ से चिपककर, बेघर ख़ुदा रोता है. Read more