तरक्की (क़ता)


चाँद सबका, सूरज सबका, सबका शब -ओ- सबेरा है.

फिर किसने लिखा ज़मीन पर, ये तेरा है, वो मेरा है.

तुम कहते हो तरक्की का सूरज चमक रह है भारत पर,

मैं पूछता हूँ, फिर क्यूँ मेरे झोपडे में अँधेरा है

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