खामोशी (क़ता) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 12, 2010 वो जुबां से कब किधर बोलती है.खामोशी उसकी मगर बोलती है.शोर करने लगता है सन्नाटा,जब कभी उसकी नज़र बोलती है. Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
दुआ February 13, 2010 बाहर ढूँढना उसे बहुत मुश्किल है. मेरे दिल में ही मेरा कातिल है, खुदा उसको उससे ही महफूज़ रखे, शीशे सा बदन है, मगर संगदिल है. Read more
नाज़ुकी February 13, 2010 रंग क्या है, चांदनी के उजाले हैं. दो होंठ गुलाबी पंखुड़ियों के प्याले हैं. इस क़दर नाज़ुक हैं सनम मिरे, ख़्वाब में चले थे, पांव में छाले हैं. Read more
रफ़ू (क़ता) February 12, 2010 आओ तुमको खुद सा हू - ब - हू कर दूं. इश्क की हकीक़त से रु - ब - रु कर दूं. दर्द ही दर्द की दवा है मेरी जान, ज़ख्म पे ज़ख्म से रफ़ू कर दूं Read more
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