एक अश्लील क़ता

बोटी से रोटी का व्यापार है, कोई क्या करे.

उसकी मजबूरी उसका इश्तिहार है, कोई क्या करे.

तवायफ़ की बेटी की बदनसीबी तो देखिये,

बाप ही उसका खरीददार है, कोई क्या करे

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