हौसला

परकटो को दे हौसलों को पर, फिर उन्हें परिंदा करूंगा.

दो अन्धेरो को रगड़कर, रौशनी जिंदा करूंगा.

शब् के सीने पर लहराऊंगा मैं बनके चराग़,

शाम से डरे सूरज को मैं शर्मिंदा करूंगा.

Comments

Popular posts from this blog

वो जो नहीं है

ख़ुदकुशी

दुआ