ख़ुदकुशी

तक़दीर ने क्या मुझसे दिल्लगी की है.

समंदर परोसा जब भी तलब -ए- तिश्नगी की है.

उस खंजर पर मिले हैं मेरे ही उँगलियों के निशान,

मेरे क़ातिल कह रहे हैं कि मैंने ख़ुदकुशी की है.

Comments

  1. bahut khoob....jitni b taref ki jae aapki kam hai

    ReplyDelete
  2. Bhiya kya Karu tarif AAP ki kise ne tarasa hai ya banaya hai apko

    ReplyDelete

Post a Comment