मुफ़लिसी Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 13, 2010 बदन में नहीं खूँ, फिर खूँ कैसे खांसा मैंबनकर ग़रीब ऐ फ़कीर बन गया हूँ तमाशा मैंरहता है सावन हर मौसम जिस जगह पे'मरा वहीँ दरिया किनारे प्यासा मैं. Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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